पिछड़े और SC के लोग शराब से ज्यादा हो रहे हैं बर्बाद: उमा भारती

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भोपाल
शराबबंदी के खिलाफ लट्ठ लेकर अभियान चलाने का ऐलान कर चुकीं मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने एक बार फिर शराबबंदी को लेकर अपनी बात रखी है. इस बार उन्होंने बात रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है. सोशल मीडिया में एक के बाद एक किए ट्वीट में उमा भारती ने कुछ ऐसा भी लिखा है जिस पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.

बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने लिखा है कि प्रदेश में पिछड़े एवं एससी, एसटी वर्ग की संख्या 92 फीसदी है. इनमें से अधिकतर लोग शराब की बुरी लत के कारण ही बर्बादी, बीमारी, पिछड़ापन एवं गरीबी के शिकार हैं. इन वर्गों की महिलाओं की संख्या करोड़ों में हैं. उनके तो जीवन के सभी कष्टों का कारण ही उनके घर के पुरुषों का शराबी होना है, जिस दिन हम शराबबंदी कर देंगे तभी इन वर्गों का कल्याण होगा. आपको बता दें कि उमा भारती ऐलान कर चुकी हैं कि वो मध्य प्रदेश में 15 जनवरी के बाद शराबबंदी को लेकर लट्ठ लेकर उतरेंगी.

प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘मेरे भोपाल स्थित निवास पर 18 सितंबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अगले साल 15 जनवरी, 2022 के बाद मध्य प्रदेश में शराबबंदी अभियान में शामिल होने के मेरे वक्तव्य के बाद इन पांच दिनों में जो प्रतिक्रिया हुई , मैं उन पर क्रमशः अपने भाव व्यक्त करती हूं. पिछड़े वर्गों के 7-8 लोगों के प्रतिनिधि मण्डल से संवाद करते समय मेरी असंयत भाषा के प्रयोग का चोरी से वीडियो बनाकर फिर उसकी क्लिप बनाकर कांग्रेस ने अधिकृत तौर पर जारी किया. उससे तो ऐसा लगता है कि शराबबंदी की गंभीरता से लोगों का ध्यान हटाने के लिए क्या मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी शराब लॉबी की बी टीम का काम करेगी? शराबबंदी से अवैध शराब की बिक्री बढ़ेगी ऐसा बोलने से पहले गुजरात एवं बिहार का अध्ययन करना चाहिए..

उमा ने लिखा,’गुजरात में बीजेपी और बिहार में एनडीए की सरकार हैं. वहां शराबबंदी है एवं वहां के मुख्यमंत्रियों को इस पर गर्व है. अवैध एवं जहरीली शराब पर रोक लगाना, राज्य शासन के लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी है. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री एवं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतोगुणी एवं दृढ़ निश्चयी व्यक्ति हैं, यही मेरे विश्वास का कारण हैं. प्रदेश में भी गुजरात की तरह बहुत बड़ी संख्या में आदिवासी हैं. जैसे गुजरात ने अपनी शराबबंदी जारी रखते हुए आदिवासियों की परम्पराओं का ध्यान रखा है, हम भी उसी तर्ज पर मध्य प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी कर सकते हैं.

उमा भारती ने लिखा, ‘बिहार जो कि मध्य प्रदेश से ज्यादा आबादी का एवं ज्यादा पिछड़ा राज्य है, जब शराबबंदी से राजस्व की हानि के उन्होंने भी विकल्प निकाल लिए तो हम तो कर ही सकते हैं. मध्य प्रदेश में पिछड़े एवं एससी, एसटी वर्ग 92 फीसदी है तथा इनमें से अधिकतर पिछड़े एवं एससी समुदाय के लोग ही शराब की बुरी लत के कारण बर्बादी, बीमारी, पिछड़ेपन एवं गरीबी के शिकार हैं.

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