जीवाजी यूनिवर्सिटी में हर पेड़ देगा अपना परिचय

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ग्वालियर

जीवाजी यूनिवर्सिटी में स्थित ऑक्सीजन जोन के पेड़ अब अपना परिचय खुद देंगे। वह बताएंगे कि उनका नाम क्या है, उनका वानस्पतिक नाम क्या है ? उनका उपयोग क्या है और उनका फायदा क्या है ? जेयू प्रबंधन का मानना है कि इससे विद्यार्थियों का ज्ञान तो बढ़ेगा ही इसके साथ ही यहां पर मॉर्निंग वॉक पर आने वाले लोग भी पेड़ों के बारे में जानेंगे तो पौधरोपण के लिए भी उनमें रुचि जागेगी। यह काम बारकोड के जरिए किया जा रहा है। इसके लिए जेयू के प्रत्येक पेड़ पर बारकोड लगाया जाएगा और इस बार कोड में पेड़ के बारे में पूरी जानकारी रहेगी।

56 प्रजातियों के पेड़
जेयू कैंपस में 56 प्रजातियों के 4882 पेड़ लगे हैं। इनमें नीम के पेड़ सबसे ज्यादा 650 हैं। अशोक के 386, टीक के 286 और आम के 94 पेड़ हैं। सफेद-काला बबूल, कस्टर्ड एपल, कदंब, कचनार, कॉटन फ्री, पलाश, शीशम, गुलमोहर, यलो गुलमोहर, आंवला, बरगद, गूलर, पीपल सहित 56 प्रजातियों के पेड़ लगे हुए हैं।

यह होगा फायदा
बारकोड मोबाइल से स्कैन करते ही पेड़ की प्रजाति, इसका सामान्य बोल-चाल की भाषा में नाम, वानस्पतिक नाम, उपयोग और फल व पत्ती के मेडिकेशनल उपयोग की जानकारी मिलेगी, जो विद्यार्थियों के ज्ञान को बढ़ाएगी। इससे लोग पौधरोपण के लिए प्रेरित होंगे।

छात्रों का ज्ञान बढे़गा
जेयू कैंपस में पेड़ों के लिए बारकोड सिस्टम तैयार करवाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ेगा और यहां आने वाले लोग भी पेड़ों के बारे में जान पाएंगे। -प्रो. संगीता शुक्ला, कुलपति

    4,882 पेड़ हैं जीवाजी यूनिवर्सिटी कैंपस में
    कोरोना संक्रमण से पहले यहां रोज 3000 लोग मॉर्निंग वॉक के लिए आते थे
    लोगों की लगातार वृद्धि के कारण आने वालों के लिए आईडेंटिटी कार्ड तक बनाने पड़े थे

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