पहले पत्नी की रिहाई की मांग, फिर खुद ही किया अदालत के सामने हाजिर

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प्रयागराज
पत्नी की उसके पिता की अवैध निरुद्धि से रिहाई की मांग करने वाले पति ने उसे खुद ही अदालत के सामने हाजिर कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति द्वारा पत्नी को कोर्ट में पेश करने पर पत्नी के अपने पिता की अवैध निरुद्धि में न मानते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अवैध निरुद्धि न होने के कारण याचिका पोषणीय नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति शमीम अहमद ने गाजीपुर की दीपमाला गिरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है।

दीपमाला गिरी ने धर्मेंद्र भारती से शादी कर ली । दोनों बालिग हैं। याचिका दायर कर धर्मेंद्र भारती ने अपनी पत्नी दीपमाला गिरी को उनके पिता अंजनी कुमार गिरि की अवैध निरुद्धि से मुक्त कराने की गुहार लगाई। कोर्ट ने पिता को नोटिस जारी कर याची को हाजिर करने का निर्देश दिया और याची अपने पति के साथ कोर्ट में पेश हुई। कोर्ट ने कहा कि याची बालिग है। वह कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र है।

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