मलेरिया की पॉजिटीविटी दर 2.99 फीसदी से गिरकर हुई 0.99 फीसदी

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जगदलपुर
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशानुरूप बस्तर को मलेरिया मुक्त बनाने हेतु जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सघन मलेरिया मुक्त अभियान चलाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि अपने मनोरम प्राकृतिक सौंदर्य एवं वन संसाधनों से परिपूर्ण बस्तर अपने विशेषताओं के कारण पूरे दुनिया के लोगों को आकर्षित करता है। लेकिन मलेरिया बीमारी बस्तर के लोगों की प्रमुख समस्याओं में से एक है, बस्तर के लोग वर्षों से इस बीमारी की समस्या से जुझ रहे हैं। इसके कारण बस्तर के लोगों को जनधन की भी क्षति उठानी पड़ी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा पिछले ढाई वर्षों के दौरान अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के अलावा बस्तर के लोगों को मलेरिया के अभिशाप से मुक्ति दिलाने का भी बीड़ा उठाया गया है। राज्य शासन के निदेर्शानुसार पूरे बस्तर जिले में सघन मलेरिया मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है।

कलेक्टर रजत बंसल के निर्देश पर बस्तर जिले को मरेलिया मुक्त बनाने के इस अभियान को सफल बनाने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरी ताकत झोंक दी है। जिले में चल रहे मलेरिया मुक्त अभियान के चारों चरणों के दौरान स्वास्थ्य विभाग के टीक के द्वारा प्रत्येक घरों में पहुंचकर सर्वे कार्य के अलावा मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों को चिंन्हित कर उनका मलेरिया जांच तथा पॉजिटिव मरीजों को दवाई आदि वितरण के अलावा मच्छरदानी का वितरण तथा नुक्कड़ नाटक एवं अन्य माध्यमों से मलेरिया की रोकथाम की उपायों की जानकारी एवं आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जा रही है। इस अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों एवं जांच दल में शामिल लोगों को कई स्थानों पर इस कार्य के लिए अत्यंत संघर्ष करना पड़ा। विशेषकर दरभा एवं लोहंडीगुड़ा विकासखण्ड के ऐसे गांव जहां आज भी आसान पहुंच मार्ग नहीं है। बारिश के दिनों में पुल-पुलियों के अभाव में नदी-नालों को पार कर पूरे साजो-सामान के साथ पहुंचे। मलेरियामुक्त बस्तर अभियान के सपने को साकार करने के लिए अधिकारी-कर्मचारियों के दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है कि इस अभियान के चारों चरण सफलतापूर्वक संपन्न होने के साथ्बैंक के दरवाजे नहीं देखे थे गीता ने, आज गांव वालों के लिए बनी बैंक वाली दीदी
कोरिया
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान ने महिलाओं को अलग-अलग आजीविका चुनने का अवसर दिया। अपने रुचि के अनुसार काम चुनकर महिलाएं ना केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं बल्कि मानसिक तौर पर भी महिलाओं में आत्मविश्वास जाएगा है। ऐसी ही कहानी है गीता दीदी की। घरेलू महिला से बैंक वाली दीदी के रूप में लोग जानने लगे है, बिहान ने मुझे मेरे नाम से पहचान दिलाई हैष् ये कहना है जनपद पंचायत खडगवां के ग्राम बंजारीडाण्ड की गीता दीदी का। गीता दीदी बताती है कि 2019 से मैं बिहान योजना के तहत माँ शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ी। यहाँ बैंक सखी का प्रशिक्षण दिया गया। इससे पहले मैं कभी बैंक तक नहीं गई थी और आज मैं बैंक के सारे कार्य कर रही हूं। इसमें खडगवां विकासखण्ड के 5 ग्राम पंचायतों का भुगतान, मनरेगा के मजदूरों का भुगतान, घर-घर जाकर पेंशन भुगतान, दिव्यांगजनो को पंचायत स्तर पर उनके घर तक सुविधाएं एवं अन्य कार्य कर रही हूं। ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव से लेकर सभी ग्रामवासी भी मुझे पहचानने लगे हैं। बिहान ने एक नई पहचान दी है।

बैंक सखी के साथ-साथ गीता दीदी मिनी राइस मिल एवं किराना दुकान का संचालन भी कर रहीं है। वे बताती है कि बैंक लिंकेज से समूह को मिले 2 लाख रुपये के लोन में से समूह की सहमति एक लाख धान एवं आटा चक्की और किराना दुकान का कार्य शुरू किया। इन सब से भी मुझे 12 -15 हजार तक की मासिक आमदनी हो जाती है। जिससे मुझे आर्थिक रूप से सबल मिला है। आर्थिक मजबूती ने गीता में आत्मविश्वास जगाया है। वे काम और घर दोनों संभाल रही हैं और परिवार की जरूरतें पूरा करने में भी बड़ा योगदान दे रही हैं।ा ही मलेरिया के दर में  तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है।

मलेरियामुक्त बस्तर अभियान के तहत न केवल घर-घर जाकर लोगों की मलेरिया जांच की जा रही है, बल्कि इसके साथ ही संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों को चिंन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर सिंथेटिक पायरेथ्राईट एवं डीडीटी आदि मच्छररोधी दवाईयों का छिड़काव किया जा रहा है। जिसके फलस्वरूप वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में सकारात्मक मलेरिया मरीजों की संख्या में 20 प्रतिशत कमी आई है।

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