तेज हुई एक्सप्रेस वे के काम की रफ्तार, मिलेगा अटल प्रगति पथ की सरकारी भूमि का आधिपत्य

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भोपाल
चंबल संभाग के विकास के लिए वरदान मानी जाने वाली अटल प्रगति पथ एक्सप्रेस-वे के दायरे में आने वाली सरकारी जमीन का आधिपत्य राज्य सरकार की ओर से 30 अक्टूबर तक एनएचएआई को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए आगामी 24 दिनों में मुरैना, भिंड और श्योपुर के कलेक्टर 20-20 लोगों की टीम बनाकर इसके काम को पूरा कराएंगे। एनएचएआई भी तीनों जिलों में तीन-तीन कर्मचारियों की जिम्मेदारी इसके लिए तय करेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा बनाई गई टीमें मुरैना जिले में 8 अक्टूबर, भिण्ड में 10 अक्टूबर और श्योपुर जिले में 12 अक्टूबर को पहुंचेंगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अटल प्रगति पथ के लिए भूमि अधिग्रहण की स्थिति में दोगुना मुआवजा देने की मंजूरी का फैसला कैबिनेट से स्वीकृत करने के बाद अब इस काम में तेजी आने की उम्मीद है। इसे देखते हुए चंबल संभाग के कमिश्नर आशीष सक्सेना ने संबंधित जिलों कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया कि निजी भूमि अधिग्रहण के मामले में खसरा नंबर सहित संपूर्ण जानकारी सीधे तीनों जिलों के कलेक्टरों को एनएचएआई के अफसर उपलब्ध कराएं ताकि किसी तरह की विसंगति हो तो स्थल निरीक्षण के दौरान उसे दूर किया जा सके।

कलेक्टरों से कहा गया कि हर जिले में आने वाली टीम को एसडीएम टीम के लोगों के साथ पटवारी, राजस्व निरीक्षक, कोटवार सहित अन्य मैदानी राजस्व अमले को भेजें जो मौके पर शासकीय भूमि का अधिपत्य प्राप्त करें। बोनी वाली जमीन पर डिमार्केशन लगाएं और पिलर बनाते जाएं। एलाईमेन्ट के अनुसार मटेरियल साथ लेकर चलें। राजस्व के समस्त पटवारियों, आरआई, कोटवार को अमले के साथ लगा दें। साथ में एक-एक अधिकारी और पुलिस का अमला भी भेजें ताकि सरकारी जमीन के आधिपत्य देने में कोई दिक्कत नहीं आए।  जहां-जहां फोरेस्ट भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, वहां फारेस्ट गार्ड रेंजर सहित अन्य अमला उपस्थित रहे। सरकारी जमीन पर जहां कब्जा है, वहां तत्काल कब्जे से मुक्त कराएं।

इस परियोजना के लिए 3 हजार 281 हेक्टेयर कुल भूमि का अधिग्रहण मुरैना, भिण्ड और श्योपुर से किया जाना है। इसमें एक हजार 523 हेक्टेयर भूमि शासकीय, 1 हजार 487 हेक्टेयर भूमि निजी रहेगी। 270 हेक्टेयर भूमि वन विभाग की रहेगी, जिसका अधिग्रहण किया जाना है। इस परियोजना के तहत मुरैना, भिण्ड और श्योपुर जिले में 7 मुख्य सेतु, 2 आरओबी, 5 एचटी लाइन का विस्थापन किया जाएगा। इस 313 किलोमीटर लम्बाई के एक्सप्रेस-वे के आसपास इंडस्ट्रियल कोरिडोर का निर्माण कराया जाएगा। इस मार्ग के निर्माण से झांसी, उत्तरप्रदेश से राजस्थान का एक प्रमुख नया मार्ग जुड़ेगा जो मध्यप्रदेश के 3 जिलों को लाभान्वित करेगा। इन दोंनो बिन्दुओं की दूरी भी लगभग 50 किलोमीटर की बचत होगी। इस एक्सप्रेस-वे के बनने में आवागमन से लगने वाला 11 घंटे का समय घटकर 6 घंटे तक हो जाएगा।

मुरैना कलेक्टर बी. कार्तिकेयन ने जानकारी दी है कि  90 प्रतिशत भूमि मुरैना बीहड़ की देने को तैयार हैं। मुरैना के 11 जौरा के 18, सबलगढ़ के 21, अम्बाह के 6 और पोरसा के 16 गांव की जमीन दी जाना है। भिण्ड कलेक्टर सतीश कुमार एस ने बताया कि अटेर के 25 गांव, भिण्ड का एक गांव की जमीन दी जाना है। श्योपुर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि श्योपुर तहसील के 36 और वीरपुर तहसील के 19 गांव शामिल है, जिनकी भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को दी जाना है।

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