श्योपुर जिले में आदिवासी महिलाओं ने उगाया ताइवान का पपीता, छह माह में आय हुई दोगुना

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श्योपुर 
मध्य प्रदेश के श्योपुर की करीब 50 आदिवासी महिला किसानों ने 50 एकड़ क्षेत्र में पपीता की ताइवान- 786 किस्म के पौधे लगाकर अच्छा मुनाफा कमाया है। इन किसानों की आय छह माह में ही दोगुना हो गई। इनके द्वारा इसी वर्ष मार्च-अप्रैल में लगाए गए पपीता के पौधे सितंबर आने तक चार-से पांच फीट तक की ऊंचाई के पेड़ बन गए हैं। इनमें से प्रत्येक पेड़ पर 50 किलो तक फल आ गए हैं। एक एकड़ में औसत उत्पादन 11 हजार 250 किलो है। महिलाओं के इस प्रयास से उत्साहित होकर क्षेत्र के पांच हजार किसान अब पपीते की इस किस्म को उगाने की तैयारी कर रहे हैं।

आदिवासियों की रुचि परंपरागत खेती की जगह फलोद्यान के प्रति बढ़ाने के लिए मप्र आजीविका मिशन ने वर्ष 2019 में समूह से जुड़ी महिलाओं को जयपुर, जबलपुर, भोपाल सहित अन्य स्थानों पर भ्रमण करवाया और इन्हें पपीता के बाग लगाने के लिए जागरूक किया। इस वर्ष मार्च-अप्रैल में दुबड़ी, बरगवां, बमोरी, कानखेड़ा, चितारा, डूडीखेड़ा, सैमरा, आमेठ, रानीपुरा, करियादेह आदि गांवों में प्रति किसान एक-एक एकड़ में ताइवान-786 पपीता के बगीचे तैयार किए। आजीविका मिशन ने 12.50 रुपये प्रति पौधा की दर से महिला किसानों को पौधे मुहैया कराए। एक एकड़ में करीब 250 पौधे लगाए गए।
 
पपीते से आय हो गई एक लाख से ज्यादा
दुबड़ी गांव की काली बाई अपने बगीचे में फलों से लदे पपीते के पेड़ को दिखाते हुए बोलीं, हमने एक एकड़ में पपीते का बाग लगाया था। पेड़ फलों से लद गए हैं। पपीते के लिए मिशन ने हमें जमीन और पौधे उपलब्ध कराए। एक एकड़ में एक लाख स्र्पये से अधिक कीमत के पपीते हो गए हैं। कम लागत में इस बार दोगुना से अधिक लाभ हुआ है।
  

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